शैलेश लोढ़ा वाले, तारक मेहता

चिराग़ भइया का रिसेप्शन था, केक कट चुका था। सब बारी-बारी उनको खिला रहे थे। इसी क्रम में शैलेश लोढ़ा जी भी खिलाने आएं। केक खिला कर, हाथ मे जो केक लगा था उसको पोछने के लिए, उन्होंने हाथ उठा कर, टिशू के लिए इशारा किया- 'टिशू प्लीज' , एक पापुलर व्यक्ति के निवेदन पर, आवश्यकता से अधिक व्यवस्था हो गयी। कई सारे हाथ उनके तरफ टिशू लिए हुए बढ़ गयें। उन्होंने किसी एक व्यक्ति के हाथ से टिशू लिया किंतु और हाथ भी इसी इंतिजार में टिके थे कि शैलेश लोढ़ा जी वो टिशू ग्रहण करें। मौके से शैलेश जी के बगल में मैं खड़ा था, इसी बात पर मैं एक व्यक्ति को हाथ पीछे करने के लिए व्यंग में बोला, 'भाई साहब, हाथ पोछना था, देह नहीं" उंसने हाथ पीछे कर लिया। व्यंग के भाव को शैलेश जी समझ गए। 

जब सारे गेस्ट चले गए थे। शैलेष जी कुछ आखिरी के गेस्ट में बचे हुये थे। सारा काम खत्म होने के बाद, मैंने भी लालसावश आखिर में उनसे पूछा, संकोच में- सर, एक फोटो। कैमरा मेन से उन्होंने ही बोला, मेरे तरफ इशारा कर के, 'भइया, एक फोटो मेरा इस लड़के के साथ लो', मैं मुस्कुरा दिया, यह तश्वीर बन गयी। 

उसके बाद उन्होंने बोला- तुमने टिश्यू पेपर पर अच्छा जवाब दिया' 

मैं सुन के खिल गया, कि अभी तक इनको याद है- 'अरे .. और क्या',  

पर उन्होंने कहा - बोलो, मगर यह देख के कि तुम्हारे होठ से, किसी को चोट ना पहुँचे। 



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